Chaibasa: चाईबासा जिले में नाबालिग बच्ची के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए दो आरोपियों को कड़ी सजा सुनाई है। चाईबासा के द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पोक्सो एक्ट के तहत सुनवाई पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें 25-25 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी। इसके अलावा अदालत ने दोनों दोषियों पर 25-25 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया है।
वर्ष 2022 का है मामला
यह मामला चाईबासा मुफस्सिल थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जो वर्ष 2022 में दर्ज किया गया था। जानकारी के अनुसार, 24 मई 2022 को मुफस्सिल थाना में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें महुलसाई निवासी सुनील देवगम और गितिलपी में रहने वाले झींकपानी के टुटुगुट्टू निवासी रवि उर्फ गोमेया पुर्ती पर एक नाबालिग बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म का गंभीर आरोप लगाया गया था।
पुलिस जांच में जुटाए गए पुख्ता साक्ष्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुफस्सिल थाना पुलिस ने तत्परता से जांच शुरू की और सभी आवश्यक साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयान एकत्र किए। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट की धारा 4/6 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 506 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया।
कोर्ट ने दोष सिद्ध होने पर सुनाई कड़ी सजा
न्यायालय में चली लंबी सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया। सजा के बिंदु पर विचार करते हुए अदालत ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए दोनों को 25-25 वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के खिलाफ अपराधों पर सख्त संदेश देने वाला माना जा रहा है, जिससे समाज में ऐसे अपराधों के प्रति कठोर चेतावनी जाती है।