Jharkhad News: मनरेगा के तहत नई योजनाओं के चयन की प्रक्रिया पूरी तरह से रोक दी गई है. इसके बाद ग्रामीण इलाकों में लोगों को विकसित भारत जीरामजी (वीबी जीरामजी) योजना के शुरू होने का इंतजार है. हालांकि झारखंड में इस नई योजना को अब तक अधिसूचित नहीं किया गया है. जब तक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक यह योजना लागू नहीं हो सकती और मनरेगा औपचारिक रूप से बंद नहीं माना जाएगा.
सरकारी प्रक्रिया और देरी
मनरेगा आयुक्त द्वारा वीबी जीरामजी योजना की अधिसूचना को लेकर ग्रामीण विकास सचिव को पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन अब तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. विभागीय स्तर पर निर्णय लंबित होने के कारण नई योजना की शुरुआत में लगातार देरी हो रही है.
राज्य सरकार की मंशा
सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार फिलहाल मनरेगा को पूरी तरह समाप्त नहीं करना चाहती है. मंत्री और विभागीय अधिकारियों की मंशा है कि अगर केंद्र सरकार की मदद बंद भी हो जाती है, तो भी राज्य अपने संसाधनों से मनरेगा को किसी न किसी रूप में चलाने का प्रयास करेगा.
वित्तीय बोझ का आकलन
वर्तमान परिस्थितियों में केवल वीबी जीरामजी योजना को लागू करने से ही राज्य सरकार पर लगभग 2000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आने का अनुमान है. यदि इसके साथ-साथ मनरेगा को भी राज्य सरकार अपने स्तर पर जारी रखती है, तो इससे आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ सकता है.
चालू वित्तीय वर्ष में झारखंड में मनरेगा के तहत 12 करोड़ मानव दिवस सृजन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था. वित्तीय वर्ष के अंत तक यह लक्ष्य लगभग पूरा होने की संभावना थी, लेकिन केंद्र की आपत्ति के बाद योजना की स्थिति कमजोर होती चली गई.
काम घटने का असर
जुलाई 2025 से ही मनरेगा के तहत काम में गिरावट और मानव दिवस में कमी दर्ज की जाने लगी थी. दिसंबर और जनवरी के दौरान इसमें कुछ सुधार भी देखा गया, लेकिन वीबी जीरामजी योजना लागू करने की घोषणा के बाद मनरेगा में नई योजनाओं का चयन बंद हो गया. इसका सीधा असर भुगतान प्रक्रिया पर भी पड़ता दिख रहा है.
मानव दिवस के मासिक आंकड़े
झारखंड में जुलाई 2025 में 103.76 लाख मानव दिवस सृजित हुए थे. अगस्त 2025 में यह घटकर 83.76 लाख हो गया. सितंबर 2025 में यह आंकड़ा 73.80 लाख दर्ज किया गया, जबकि अक्टूबर 2025 में यह और गिरकर 62.15 लाख रह गया. नवंबर 2025 में इसमें हल्का सुधार हुआ और यह 72.47 लाख तक पहुंचा. दिसंबर 2025 में यह बढ़कर 95.12 लाख हुआ, लेकिन जनवरी 2026 में फिर से घटकर 80.78 लाख रह गया.
मनरेगा से वीबी जीरामजी योजना की ओर बदलाव की प्रक्रिया में स्पष्ट नीति और समयबद्ध निर्णय का अभाव साफ दिखाई दे रहा है. इससे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था अस्थिर हो रही है और राज्य सरकार पर भारी वित्तीय दबाव बनने की आशंका है. यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो इससे रोजगार सृजन, भुगतान व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.