Jamshedpur: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए विनियमन को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। इसी कड़ी में जमशेदपुर में भी इसका विरोध खुलकर सामने आया। मंगलवार को सोनारी स्थित भूतनाथ मंदिर के समीप सामान्य वर्ग की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें यूजीसी के नए नियमों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह विनियमन देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए बहुत खतरनाक साबित हो सकता है।
स्वायत्तता को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम
बैठक में मौजूद विधायक के जनसुविधा प्रतिनिधि मुकुल मिश्रा ने यूजीसी के नए विनियमन पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह नियम विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे शिक्षा व्यवस्था का अत्यधिक केंद्रीकरण होगा और विश्वविद्यालयों की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता समाप्त हो जाएगी। इसका सीधा असर राज्यों के अधिकारों और स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर पड़ेगा।
मुकुल मिश्रा ने आगे कहा कि यदि यह विनियमन लागू होता है तो विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक कामकाज, शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया और अकादमिक निर्णयों में सरकार का हस्तक्षेप बढ़ जाएगा। यह न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करेगा, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त शिक्षा के अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ होगा।
बैठक में वक्ताओं ने रखे विचार
बैठक में मौजूद रवि शंकर सिंह, आशुतोष सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि यूजीसी के नए नियम शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता को सीमित करेंगे। इससे शिक्षक खुलकर शोध और नवाचार नहीं कर पाएंगे, जिसका सीधा नुकसान छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा। वक्ताओं ने आशंका जताई कि यह विनियमन लंबे समय में शिक्षा को एक नियंत्रित और निर्देशित ढांचे में बांध देगा, जिससे उसकी मौलिक आत्मा खत्म हो जाएगी।
उपायुक्त कार्यालय समक्ष होगा प्रदर्शन
बैठक के दौरान सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यूजीसी के नए विनियमन के विरोध में 29 जनवरी को उपायुक्त कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की योजना भी बनाई गई। वक्ताओं ने बताया कि धरना-प्रदर्शन के साथ-साथ संवाद कार्यक्रम, गोष्ठियां और अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से आम जनता को इस विषय की गंभीरता से अवगत कराया जाएगा।
यह लड़ाई किसी एक वर्ग की नहीं
इसके अलावा, विभिन्न सामाजिक संगठनों, शिक्षक संघों और छात्र संगठनों से संपर्क कर एक व्यापक जनआंदोलन खड़ा करने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी है। इसलिए शिक्षा व्यवस्था की स्वायत्तता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर आवाज़ उठानी होगी।