Jharkhand Politics: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने 131 लोगों को पद्म पुरस्कार देने की घोषणा की. इस सूची में खेल, सिनेमा और समाज सेवा से जुड़े कई चर्चित और गैर-चर्चित नाम शामिल हैं. लेकिन झारखंड की राजनीति में हलचल उस वक्त तेज हो गई, जब मर्णोपरांत शिबू सोरेन को पद्मभूषण दिए जाने का ऐलान हुआ. दिशोम गुरु के नाम के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठने लगा कि क्या यह सम्मान सिर्फ सम्मान भर है या इसके पीछे कोई बड़ा सियासी संकेत छिपा है.
गठबंधन की चर्चाओं के बीच आया फैसला
शिबू सोरेन को पद्मभूषण ऐसे समय में दिया गया है, जब भारतीय जनता पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच संभावित नजदीकियों की चर्चाएं पहले से चल रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सामान्य नहीं है, बल्कि इसे मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में देखा जा रहा है. खासकर तब, जब इंडिया ब्लॉक के भीतर एकजुटता को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं.
चौधरी चरण सिंह वाला उदाहरण फिर चर्चा में
राजनीतिक गलियारों में दो साल पुरानी एक घटना फिर याद की जा रही है. साल 2024 में राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी के इंडिया ब्लॉक से अलग होने की अटकलें लग रही थीं. उसी दौरान मोदी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने की घोषणा की. इसके बाद जयंत चौधरी ने सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री का आभार जताया और कुछ ही समय में एनडीए का हिस्सा बन गए. आज वह केंद्र सरकार में मंत्री हैं. इसी उदाहरण को जोड़कर अब शिबू सोरेन के पद्मभूषण को देखा जा रहा है.
शोक की घड़ी में मोदी की मौजूदगी
झारखंड की राजनीति में एक और दृश्य अक्सर चर्चा में आता है. पिछले साल 4 अगस्त को शिबू सोरेन के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के गंगाराम अस्पताल पहुंचे थे. उन्होंने न सिर्फ शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी, बल्कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गले लगाकर ढांढस भी बंधाया. उस समय कोई राजनीतिक चर्चा नहीं थी, माहौल पूरी तरह शोक का था. लेकिन प्रधानमंत्री की उस मौजूदगी और तस्वीरों को आज की परिस्थितियों में अलग नजरिये से देखा जा रहा है.
दिल्ली दौरे और मुलाकातों से बढ़ी अटकलें
हाल के दिनों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन का दिल्ली दौरा भी सियासी चर्चाओं का कारण बना. केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकातों की खबरों ने अटकलों को और हवा दी. यहां तक कहा गया कि गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात हुई है, हालांकि हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने इन दावों को नकारा है. बिहार चुनाव में एनडीए की जीत के बाद भी यह चर्चा तेज हुई थी कि जेएमएम कांग्रेस से दूरी बना सकती है.
सम्मान पर आभार और राजनीतिक संदेश
पद्मभूषण की घोषणा के बाद हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार का आभार जताया. साथ ही यह भी कहा कि दिशोम गुरु भारत रत्न के हकदार थे. इस बयान के बाद राजनीतिक विश्लेषण और तेज हो गया. कुछ लोग इसे सम्मान स्वीकार करने की औपचारिक प्रतिक्रिया मान रहे हैं, तो कुछ इसे सियासी संतुलन साधने की कोशिश बता रहे हैं.
शिबू सोरेन को मर्णोपरांत पद्मभूषण दिया जाना अपने आप में एक बड़ा सम्मान है, लेकिन भारतीय राजनीति में प्रतीकों और संदेशों का अपना महत्व होता है. यह फैसला सच में राजनीतिक गठबंधन की भूमिका बनेगा या सिर्फ सम्मान तक सीमित रहेगा, यह आने वाला वक्त बताएगा. फिलहाल इतना तय है कि मोदी सरकार के इस कदम ने झारखंड की राजनीति में नए सवाल और नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है.