Jharkhand News: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 को लेकर झारखंड सरकार ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दावोस में झारखंड की भागीदारी और प्रस्तुति को लेकर केंद्र सरकार के साथ अहम बैठक में हिस्सा लिया. यह मामला पूरी तरह निवेश और विकास से जुड़ा है और इसमें किसी भी तरह की गिरफ्तारी नहीं हुई है. बैठक का उद्देश्य WEF 2026 में झारखंड की मजबूत मौजूदगी और राज्य के लिए वैश्विक निवेश के अवसर तैयार करना है.
वन इंडिया, वन विजन के तहत हुई वर्चुअल बैठक
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में आयोजित वर्चुअल बैठक में भाग लिया. बैठक में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 की समग्र तैयारियों और रणनीति की समीक्षा की गई. इस दौरान वन इंडिया वन विजन के संदेश के साथ राज्यों की भूमिका और प्रस्तुति पर चर्चा हुई.
दावोस में झारखंड की प्रस्तुति की रूपरेखा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने #JharkhandAtDavos की तैयारियों की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि दावोस में झारखंड अपनी औद्योगिक क्षमता और निवेश की संभावनाओं को राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप वैश्विक मंच पर रखेगा. राज्य का फोकस निवेशकों के लिए स्पष्ट और भरोसेमंद तस्वीर पेश करने पर रहेगा.
निवेश के प्रमुख सेक्टर तय
मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड दावोस में क्रिटिकल मिनरल्स और माइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग, ईवी और ऑटोमोबाइल सेक्टर, सुपरफूड्स और फूड प्रोसेसिंग, फॉरेस्ट और बायो इकोनॉमी, एनर्जी और रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांजिशन, पर्यटन और टेक्सटाइल्स जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसरों को प्रमुखता से सामने रखेगा.
केंद्र के विजन के साथ तालमेल पर जोर
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि दावोस में झारखंड की पूरी प्रस्तुति केंद्र सरकार के विजन और उद्देश्यों के अनुरूप होगी. इसका मकसद झारखंड को ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मैप पर एक मजबूत और भरोसेमंद डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करना है.
वैश्विक निवेशकों से सीधे जुड़ने का बड़ा मंच
WEF 2026 झारखंड के लिए वैश्विक निवेशकों से सीधे जुड़ने का बड़ा मंच साबित हो सकता है. मुख्यमंत्री स्तर पर की गई यह तैयारी बताती है कि राज्य सरकार निवेश और विकास को लेकर पहले से रणनीतिक योजना पर काम कर रही है. दावोस में तय सेक्टरों पर फोकस से झारखंड को रोजगार, औद्योगिक विस्तार और सतत विकास के नए अवसर मिलने की संभावना है. केंद्र और राज्य के समन्वय से यह पहल झारखंड की आर्थिक छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कर सकती है.