Jamshedpur: झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर शहर के लिहाज से एक बहुत कड़ा निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने जमशेदपुर अक्षेस (जेएनएसी) क्षेत्र में अवैध रूप से निर्मित भवनों के हिस्सों को ध्वस्त करने का स्पष्ट आदेश दिया है। इस फैसले के बाद शहर में प्रशासनिक और भवन मालिकों के बीच हड़कंप मच गया है।
25 फरवरी तक झारखंड हाईकोर्ट में प्रस्तुत हो रिपोर्ट
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार जेएनएसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कुल 24 इमारतों के अवैध रूप से बने हिस्सों को तोड़ा जाएगा। कोर्ट ने जमशेदपुर अक्षेस को निर्देश दिया है कि चार सप्ताह के भीतर सभी अवैध हिस्सों को ध्वस्त कर इसकी विस्तृत रिपोर्ट 25 फरवरी तक झारखंड हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाए।
इन 24 भवनों में शहर के प्रमुख और व्यस्त इलाकों की इमारतें शामिल हैं। इनमें बिष्टुपुर, साकची, सीएच एरिया, सोनारी, कदमा समेत अन्य कई क्षेत्रों की इमारतें चिन्हित की गई हैं। इन इलाकों में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक और आवासीय निर्माण होने के कारण यह फैसला अहम माना जा रहा है।
यह मामला राकेश कुमार झा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। बुधवार को इस याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति एस.ए. प्रसाद की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान जमशेदपुर अक्षेस के कार्यपालक पदाधिकारी स्वयं न्यायालय में उपस्थित रहे।
अवैध भवनों के हिस्से को तत्काल तोड़ने आदेश
सुनवाई के दौरान जेएनएसी की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच में कुल 24 भवनों के हिस्से अवैध पाए गए हैं। इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने उन सभी अवैध निर्माणों को तत्काल तोड़ने और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया।
अगली सुनवाई 9 मार्च को
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश अंतरिम (इंटरिम) प्रकृति का है और आगे भी ऐसे अवैध निर्माणों से जुड़े मामलों की सुनवाई जारी रहेगी। इस प्रकरण की अगली सुनवाई 9 मार्च को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से इस मामले की प्रभावी पैरवी अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने की। हाईकोर्ट के इस फैसले को जमशेदपुर में अवैध निर्माण पर सख्ती और कानून के पालन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।