Ranchi News: अंश और अंशिका के अपहरण मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि बच्चों के अपहरण के पीछे मानव तस्करी का संगठित नेटवर्क काम कर रहा था. सीआईडी एडीजी और रांची के प्रभारी आईजी मनोज कौशिक ने पुष्टि की है कि दोनों बच्चों को अगवा करने वाले आरोपी मानव तस्करी से जुड़े अंतर्राज्यीय गिरोह का हिस्सा हैं. जांच में दूसरे राज्यों के मानव तस्करों से इनके संपर्क के साक्ष्य भी मिले हैं.
गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास खंगाल रही पुलिस
एडीजी मनोज कौशिक के अनुसार गिरफ्तार आरोपी नव कुमार खेरवार उर्फ सूर्या और सोनी खेरवार के आपराधिक रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की जा रही है. यह पता लगाया जा रहा है कि इनके खिलाफ झारखंड में पहले से कोई मामला दर्ज है या नहीं. साथ ही देश के अन्य राज्यों में इनके आपराधिक इतिहास की भी पड़ताल की जा रही है. पुलिस इस पूरे मामले में बड़े मानव तस्करी नेटवर्क की भूमिका को लेकर गहराई से जांच कर रही है.
व्यापारी संगठनों ने पुलिस के प्रयासों की सराहना की
इधर बच्चों की सकुशल बरामदगी के बाद झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स ने डीजीपी को पत्र भेजकर झारखंड पुलिस की सराहना की है. चैंबर की ओर से कहा गया है कि मौसीबाड़ी से लापता बच्चों को सुरक्षित बरामद करना पुलिस की तत्परता और समर्पण को दर्शाता है. व्यवसायी समाज की ओर से सभी वरीय अधिकारियों पदाधिकारियों और जवानों के प्रति आभार व्यक्त किया गया है.
बिहार ले जाने की तैयारी में थे आरोपी
जांच में सामने आया है कि आरोपी दंपति बाजार और हाट में बैलून बेचने का काम करते थे. वे कुछ दिन पहले ही रांची पहुंचे थे और बच्चों की तलाश में इधर उधर घूम रहे थे. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे दोनों बच्चों को बिहार ले जाने की योजना बना रहे थे. इससे पहले कि वे अपने मंसूबों में सफल होते पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया.
झारखंड में बच्चा चोरी का बदला हुआ पैटर्न
बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता बैद्यनाथ कुमार ने दावा किया है कि झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में बच्चा चोरी और मानव तस्करी करने वाले गिरोह फिर से सक्रिय हो गए हैं. उनके अनुसार करीब दस साल पहले भी ऐसा नेटवर्क राज्य में सक्रिय था. अब मानव तस्करी का तरीका बदल चुका है. गिरोह ऐसे छोटे बच्चों को निशाना बना रहा है जो समय के साथ अपने माता-पिता को भूल सकता है.
झारखंड में मानव तस्करी का खतरा
अंश और अंशिका अपहरण मामले ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड में मानव तस्करी का खतरा अब भी गंभीर बना हुआ है. पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ी साजिश नाकाम हुई है लेकिन जांच में सामने आए अंतर्राज्यीय लिंक यह संकेत देते हैं कि यह मामला सिर्फ दो आरोपियों तक सीमित नहीं है. आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ने के साथ मानव तस्करी नेटवर्क की परतें और खुल सकती हैं.